Sahar Kabhi Kabhi | Rupin Vig | Gazal And Nazam Sangrah

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सहर कभी कभी' जाने-माने लेखक, नाटककार और संगीतकार रुपिन विग द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील ग़ज़ल और नज़्म संग्रह है। यह पुस्तक लेखक की सोच और जिंदगी के नजरिए का एक बेहतरीन सारांश है।

इस संग्रह में प्रेम, बिछड़ने का गम, जीवन, और मौत जैसे विभिन्न गहरे विषयों को बेहद खूबसूरत और प्रभावशाली अश्आर (शेरों) व नज़्मों के माध्यम से उकेरा गया है। किताब की पंक्तियाँ पाठकों के दिलों को छू जाती हैं—

"इसी का नाम ज़िंदगी

इसी को सब हैं चाहते

इसी में दर्द हैं बसे

इसी में छुपी राहतें"

यदि आपको शायरी, हिंदी-उर्दू अदब और रूहानी कविताओं से प्रेम है, तो यह पुस्तक आपके व्यक्तिगत संग्रह के लिए एक नायाब कृति है।

प्रोफेसर रुपिन विग की कर्मभूमि मुंबई है, लेकिन उनकी जन्मभूमि दिल्ली है जहाँ उनकी पैदाइश और परवरिश हुई। उनका थिएटर्स और अदब से पुराना ताल्लुक रहा है; दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (N.S.D.) की अनेकों पेशकशों का हिस्सा रहे और पंकज कपूर, सुषमा सेठ व नादिरा बब्बर जैसे विख्यात नाट्य निर्देशकों के साथ काम कर कला में निपुणता पाई।

कॉलेज के दौरान कई अवार्ड-विनिंग नाटकों का लेखन और निर्देशन करने वाले रुपिन जी के लिखे नाटक दूरदर्शन और सैटेलाइट टीवी पर भी प्रसारित हुए हैं। पेशे से फिजिक्स के प्रोफेसर होने के बावजूद, हिंदी और उर्दू रचनाएं लिखना उनका शौक रहा है—आखिर गालिब और दाग की सरज़मीन का असर होना लाज़मी था! इसके साथ-साथ वह एक मझे हुए कंपोज़र और संगीतकार भी हैं, जिनके लिखे गानों को Spotify, Apple Music, Saregama Carvaan और YouTube Music पर श्रोताओं ने बहुत सराहा है। इन दिनों उनका ज्यादातर वक्त तख्लीफ (रचनात्मकता) में गुजरता है और वह मुशायरों व कवि सम्मेलनों में भी लगातार शिरकत करते हैं।