Pratidarsh: Khajuraho – Kinvadantiyon Se Kala Tak | Bhubneshwar Upadhyay| Historical Fiction Hindi Novel
खजुराहो की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, दार्शनिक और कलात्मक यात्रा पर आधारित एक विचारोत्तेजक उपन्यास
₹449.00₹375.00
क्या खजुराहो केवल अपनी मूर्तियों के कारण प्रसिद्ध है, या उसके पीछे एक ऐसा इतिहास छिपा है जिसने भारतीय सभ्यता की दिशा बदल दी?
"प्रतिदर्श : खजुराहो – किंवदंतियों से कला तक..." केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, कला, दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम है।
यह कथा पाठक को उस समय में ले जाती है जहाँ सत्ता, प्रेम, त्याग, धर्म, काम, मोक्ष और कला एक-दूसरे से टकराते भी हैं और एक-दूसरे को पूर्ण भी करते हैं।
उपन्यास के पात्र—हेमवती, मालविका, सुकेश, चंद्रवर्मन और अनेक अन्य—सिर्फ कहानी के पात्र नहीं, बल्कि उस युग की आत्मा के प्रतिनिधि हैं। उनके संघर्ष, समर्पण और जीवन-दर्शन के माध्यम से लेखक खजुराहो के निर्माण, उसकी किंवदंतियों और उसके पीछे छिपे सांस्कृतिक सत्य को नई दृष्टि से प्रस्तुत करते हैं।
यह पुस्तक इतिहास और कल्पना के संतुलन के साथ पाठकों को उस प्रश्न से भी रूबरू कराती है कि क्या कला केवल सौंदर्य है, या वह सभ्यता की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति भी है?
यदि आप भारतीय इतिहास, संस्कृति, मंदिर स्थापत्य, दर्शन, पुरातत्व और ऐतिहासिक उपन्यासों में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक आपके संग्रह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी।
यह पुस्तक किन पाठकों के लिए है?
भारतीय इतिहास के प्रेमियों के लिए
ऐतिहासिक उपन्यास पढ़ने वाले पाठकों के लिए
खजुराहो एवं भारतीय मंदिर स्थापत्य में रुचि रखने वालों के लिए
कला एवं संस्कृति के शोधार्थियों के लिए
दर्शन और भारतीय सभ्यता को समझने वाले पाठकों के लिए
भुवनेश्वर उपाध्याय भारतीय इतिहास, संस्कृति, दर्शन और साहित्य के गंभीर अध्येता एवं लेखक हैं। भारतीय सभ्यता के विविध आयामों पर उनका गहन अध्ययन उनकी लेखनी में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
"प्रतिदर्श : खजुराहो – किंवदंतियों से कला तक..." उनके शोध, ऐतिहासिक दृष्टि और रचनात्मक कल्पना का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस उपन्यास के माध्यम से उन्होंने इतिहास, संस्कृति, स्थापत्य और मानवीय मूल्यों को रोचक कथा शैली में प्रस्तुत किया है।

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