Main Shabd Bechta Hoon | Ramanlal Kushwah "Tauji"

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मैं शब्द बेचता हूँ

"शब्द बिक सकते हैं, पर भाव नहीं।"

मैं शब्द बेचता हूँ वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं साहित्यकार रमणलाल कुशवाह 'ताऊजी' का पहला कविता संग्रह है। यह संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवन के विविध अनुभवों, मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष, समाज, रिश्तों, प्रकृति और आत्ममंथन का भावपूर्ण दस्तावेज़ है।

इस पुस्तक की प्रत्येक कविता पाठक के मन को छूती है और उसे स्वयं से संवाद करने के लिए प्रेरित करती है। सरल, सहज एवं प्रभावशाली भाषा में लिखी गई रचनाएँ आम जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं को गहरे अर्थ प्रदान करती हैं।

यदि आप ऐसी कविताएँ पढ़ना चाहते हैं जो आपके भीतर संवेदनाओं को जगाएँ, सोचने पर विवश करें और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा दें, तो "मैं शब्द बेचता हूँ" आपके लिए एक उत्कृष्ट काव्य संग्रह है।

मुख्य विषय

जीवन दर्शन

प्रेम एवं संवेदनाएँ

सामाजिक सरोकार

रिश्तों की गरिमा

प्रकृति

आत्मचिंतन

मानवीय मूल्य