Bhuvaneshwar Upadhyay Ke Sahitya Mein Vyakt Jan Jeevan’ | Dr. Mangale Mehboob Sharfouddin

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Bhuvaneshwar Upadhyay Ke Sahitya Mein Vyakt Jan Jeevan’ साहित्य, समाज और जनजीवन के पारस्परिक संबंधों को समझने वाली एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसमें साहित्यकार भुवनेश्वर उपाध्याय के साहित्य के माध्यम से जनजीवन, सामाजिक सरोकारों और आम व्यक्ति के अनुभवों को समझने का प्रयास किया गया है।

साहित्य केवल कल्पना की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अपने समय, समाज और उसमें जीने वाले लोगों की संवेदनाओं का भी दस्तावेज होता है। इसी दृष्टि से यह पुस्तक भुवनेश्वर उपाध्याय के साहित्य में अभिव्यक्त जनजीवन के विभिन्न पक्षों को सामने लाती है।

लेखक डॉ. मंगले मेहबूब शरफोद्दीन ने साहित्यिक अध्ययन के साथ-साथ सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए विषय का विवेचन किया है। पुस्तक साहित्य के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों, आलोचकों और हिंदी साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है।

यह पुस्तक साहित्य के माध्यम से समाज, व्यक्ति, संवेदना और जनजीवन को देखने की एक अध्ययनपरक दृष्टि प्रस्तुत करती है।

विशेषताएँ

भुवनेश्वर उपाध्याय के साहित्य का अध्ययन

साहित्य में अभिव्यक्त जनजीवन का विश्लेषण

सामाजिक एवं मानवीय सरोकारों पर केंद्रित अध्ययन

हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी

साहित्य और समाज के संबंध को समझने का प्रयास

शोध एवं आलोचनात्मक दृष्टिकोण से तैयार पुस्तक

डॉ. मंगले मेहबूब शरफोद्दीन हिंदी साहित्य से जुड़े अध्यापक, लेखक एवं शोधपरक अध्येता हैं। वे वर्ष 1995 से हिंदी विभाग, आजाद महाविद्यालय, औसा, जनपद लातूर (महाराष्ट्र) में अध्यापन कार्य से जुड़े हैं।

उन्होंने एम.ए., एम.फिल. एवं पीएच.डी. की शिक्षा प्राप्त की है। साहित्यिक गतिविधियों, संगोष्ठियों और अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी सक्रिय सहभागिता रही है।

उनकी प्रकाशित कृतियों में ‘शैलेश मटियानी के कथा साहित्य में चित्रित दलित विमर्श’ तथा ‘भुवनेश्वर उपाध्याय के साहित्य में व्यक्त जनजीवन’ प्रमुख हैं। उनके अनेक आलेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।