Atithi Shikshak Bhav | Kapil Mishra | Hindi Novel

शिक्षा व्यवस्था, संघर्ष और उम्मीदों की एक संवेदनशील कहानी

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क्या एक शिक्षक केवल नौकरी करता है, या वह समाज के भविष्य को गढ़ता है?

"अतिथि शिक्षक भव:" एक संवेदनशील उपन्यास है जो शिक्षा व्यवस्था के उस अनदेखे पक्ष को सामने लाता है, जहाँ एक शिक्षक अपने कर्तव्य, संघर्ष और सपनों के बीच लगातार जूझता है।

यह कहानी है उन अतिथि शिक्षकों की, जो सीमित संसाधनों, अनिश्चित भविष्य और व्यवस्था की चुनौतियों के बावजूद बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं।

कपिल मिश्रा ने इस उपन्यास के माध्यम से विद्यालय, शिक्षक, विद्यार्थी और समाज के बीच के रिश्तों को बेहद सहज और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है।

यह केवल एक शिक्षक की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों शिक्षकों की आवाज है जो शिक्षा के मंदिर में अपना योगदान देते हुए सम्मान और स्थायित्व की तलाश में हैं।

यदि आप शिक्षा, समाज, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।

विषय: ✔ शिक्षा व्यवस्था

✔ शिक्षक जीवन

✔ अतिथि शिक्षक संघर्ष

✔ ग्रामीण एवं सामाजिक परिवेश

✔ मानवीय संवेदनाएँ