
आयुध भस्मांग पर्व (Ayudh Bhasmaang Parv') By Nilesh Pathak
“भस्माङ्ग पर्व” - आयुध श्रृंखला का प्रथम अध्याय
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“भस्माङ्ग पर्व” - आयुध श्रृंखला का प्रथम अध्याय
क्या आप आधुनिक साइंस और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम के साक्षी बनने के लिए तैयार हैं? नीलेश पाठक द्वारा रचित 'आयुध: भस्माङ्ग पर्व' एक ऐसी महागाथा है जो आपको इतिहास, पौराणिक रहस्यों और भविष्य के युद्ध के एक काल्पनिक रोमांच पर ले जाएगी।
कहानी की एक झलक:
सागर मंथन और अमृत विभाजन से जन्मी इस काल्पनिक गाथा में देव, दानव, मानव, नाग और चौदह भुवन — सभी समय की अदृश्य डोरियों से बंधे हैं। कलियुग की अंधकारमय छाया में प्रकट होता है सत्ययुग का एक अद्वितीय महारथी — महर्षि भस्माङ्ग। सात दुर्लभ सिद्धियों, अनगिनत दिव्य अस्त्रों और चंद्रहास परशु से सुसज्जित, उनका एकमात्र लक्ष्य कपाल महाकाल योग के माध्यम से पंच महाविकारों से प्रभावित लोगों को अनंतशून्य में विलीन कर कलियुग को पुनः सत्ययुग में स्थापित करना है।
पर समय तत्वों (भूत-भविष्य-वर्तमान) की शक्ति असीम है, और इन्हीं तत्वों को पाने के लिए आगे बढ़ रहा है तमस — एक असुर वंशज, जो एक महादैत्य को वर्तमान में लाकर असुरों का स्वर्णिम साम्राज्य पुनः खड़ा करना चाहता है।
निर्णायक संघर्ष:
क्या शिवाय का दिव्य त्रिशूल और महर्षि सर्वग्य का मार्गदर्शन भस्माङ्ग के परशु और तमस की तामसिक शक्तियों को रोक पाएगा?
क्या DSF (Defense Against Supernatural Forces) रुद्र ऊर्जाओं से 'प्रोजेक्ट बर्बरिक' को सफलतापूर्वक आरंभ कर सकेगा?
यह केवल दो पक्षों का नहीं, बल्कि भूत, भविष्य और वर्तमान का युद्ध है। एक ऐसी महागाथा जहाँ हर अंत एक नया आरम्भ है जो एक और गहरे रहस्य का द्वार खोलती है।
!! अंतः अस्ति प्रारंभः !!
Nilesh Pathak represents a new wave of Indian storytellers reimagining mythology for contemporary audiences. The AYUDH series is designed to engage modern youth familiar with Western superhero narratives, offering a cinematic blend of action and cultural depth.
भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक और रोमांचक दृष्टिकोण से पेश करने वाले नीलेश पाठक की लेखनी पाठकों को आदि-अनंत के रहस्यों से जोड़ती है।
"एक अत्यंत रोमांचक और तीव्र गति से बढ़ने वाला उपन्यास, जो भारतीय मिथकों (Mythology) को हॉलीवुड स्तर के सस्पेंस और साइंस-फिक्शन (Sci-Fi) के साथ जोड़ता है। 'प्रोजेक्ट बर्बरिक' और 'DSF' जैसे कॉन्सेप्ट्स हिंदी साहित्य में 'नयी वाली हिंदी' के पाठकों के लिए एक विजुअल ट्रीट की तरह हैं। नीलेश पाठक की कल्पनाशीलता और विचार प्रकाशन का यह अनूठा प्रयास सराहनीय है।"
— संपादक मंडल, विचार प्रकाशन

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